यूपी को मिलेगा कमल की आकृति वाला नया विधान भवन, लखनऊ में 5,200 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा आधुनिक प्रशासनिक परिसर

यूपी को मिलेगा कमल की आकृति वाला नया विधान भवन, लखनऊ में 5,200 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा आधुनिक प्रशासनिक परिसर

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UP to get a new Legislative Assembly building shaped

लखनऊ। UP to get a new Legislative Assembly building shaped, उत्तर प्रदेश के नये विधान भवन की डिजाइन लगभग फाइनल है। लखनऊ के गोमतीनगर में सहारा शहर की 245 एकड़ जमीन पर प्रस्तावित नए विधान भवन व प्रशासनिक परिसर के निर्माण की प्रक्रिया ने गति पकड़ ली है।

लखनऊ में प्रस्तावित नये विधान भवन का मॉडल कमल के फूल के आकार का होगा। 200 से 245 एकड़ के विशाल क्षेत्र में बनने वाले इस भव्य कॉम्प्लेक्स की संरचना भारतीय संस्कृति और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम होगी। इसकी अनुमानित लागत ₹5,200 करोड़ है।

परियोजना के लिए देश की 48 कंसल्टेंट संस्थाओं ने अपने डिजाइन और मास्टर प्लान की प्रस्तुति दी। इन प्रस्तावों का परीक्षण किया गया है। लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि हमने 12 डिजाइन का प्रस्तुतीकरण देखा था, इनमें से तीन डिजाइन को शासन को भेजा गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सलाहकार सेवानिवृत वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अवनीश कुमार अवस्थी ने गुरुवार को अपने एक्स हैंडिल पर नये विधान भवन के मॉडल को पोस्ट किया और उसकी खासियत को बताया। उन्होंने लिखा कि लखनऊ को सहारा शहर, गोमती नगर में कमल के आकार से प्रेरित प्रस्तावित विधान भवन के रूप में एक नया आर्किटेक्चरल लैंडमार्क मिलने वाला है।

इसमें होगा 200 एकड़ का वर्ल्ड-क्लास लेजिस्लेटिव कैंपस, 700 सीटों वाली विधानसभा, 200 सीटों वाली विधान परिषद, एक हजार सीटों वाला जॉइंट सेशन हॉल और 5,000 से अधिक गाड़ियों के लिए पार्किंग। इसके निर्माण अगले वर्ष यानी 2027 में शुरू होने की उम्मीद है। यह एक ऐसा लैंडमार्क प्रोजेक्ट है जो आधुनिक गवर्नेंस, शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर और भविष्य के लिए तैयार राजधानी के तौर पर उत्तर प्रदेश के विजन को दर्शाता है।

भवन कमल की पंखुड़ियों की तरह

उत्तर प्रदेश के नए विधान भवन के मॉडल को ऊपर से देखने पर मुख्य विधानसभा भवन कमल की पंखुड़ियों की तरह दिखाई देगा। कमल को उत्तर प्रदेश की संस्कृति और विकास का प्रतीक माना जाता है। इस परिसर में केवल विधानसभा ही नहीं, बल्कि आधुनिक सचिवालय, मुख्यमंत्री आवास, विधायक हॉस्टल, और वीवीआईपी प्रशासनिक ब्लॉक भी शामिल होंगे। इस नए सदन में 700 विधायकों के बैठने की शानदार व्यवस्था होगी। इसके साथ ही प्रत्येक जिले के प्रतिनिधियों के लिए अलग-अलग चर्चा की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। लखनऊ विकास प्राधिकरण कंसलटेंट और आर्किटेक्ट के माध्यम से इसका नक्शा और डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करा रहा है। एलडीए ने तीन डिजाइन शासन को भेजी थी और कमल के फूल के आकार वाली डिजाइन को फाइनल किया गया है।

विधानसभा का मुख्य सभागार

इस भवन की मुख्य संरचना कमल के आकार में होगी। इसके बीच में विधानसभा का मुख्य सभागार होगा और उसके चारों तरफ पंखुड़ियों की तरह अलग-अलग विंग्स बनेंगी। इन विंग्स में कार्यालय, लाइब्रेरी, शोध केंद्र और डिजिटल मीटिंग हॉल शामिल होंगे। परिसर को पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल बनाने की भी योजना है। सोलर पैनल, रेन वाटर हॉर्वेस्टिंग और हरियाली पर विशेष जोर दिया जाएगा।

सिर्फ एक इमारत नहीं, यूपी की विविधता

प्रस्तावित विधानसभा परिसर सिर्फ एक इमारत नहीं होगी, बल्कि यह यूपी की विविधता को भी दर्शाएगी। इसमें हर जिले के विधायकों और प्रतिनिधियों के लिए अलग-अलग बैठक और चर्चा की व्यवस्था की जाएगी। अभी तक सभी जिलों के प्रतिनिधियों की बैठकें एक ही हॉल या कमेटी रूम में होती थीं, जिससे समय और समन्वय की दिक्कत आती थी। 75 जिलों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग सेक्टर बनाए जाएंगे। हर जिले का अपना मीटिंग जोन होगा, जहां उस जिले से जुड़े विकास कार्य, समस्याओं और प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा हो सकेगी। इससे विधायकों को अपने क्षेत्र के मुद्दों को ज्यादा व्यवस्थित तरीके से रखने का मौका मिलेगा। अधिकारियों का मानना है कि इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी और जनता से जुड़े कामों में पारदर्शिता आएगी।

विकास का एक मॉडल सेंटर

योगी आदित्यनाथ सरकार का उद्देश्य है कि नया विधानभवन परिसर सिर्फ कानून बनाने की जगह न रहे, बल्कि यह प्रदेश के विकास का एक मॉडल सेंटर बने। इसमें अत्याधुनिक तकनीक, ई-विधानसभा सिस्टम और आम जनता के लिए विजिटर गैलरी की भी सुविधा होगी।

सौ करोड़ के शुरुआती टोकन अमाउंट का प्रावधान

इस मेगा प्रोजेक्ट के शुरुआती मास्टर प्लान और डिजाइन/कंसल्टेंट के चयन की प्रक्रिया के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल के बजट (मई 2026 में पारित बजट 2026-27) में सौ करोड़ के शुरुआती टोकन अमाउंट का प्रावधान किया है। वर्ष 2026 के बाद देश में लोकसभा और विधानसभा सीटों का नया परिसीमन (Delimitation) होना है। जिससे उत्तर प्रदेश में विधायकों की संख्या वर्तमान 403 से काफी बढ़ जाएगी। इसी भविष्य की आवश्यकता (विधायकों के बैठने की क्षमता) को देखते हुए सरकार इसे संभावित रूप से 2029-2030 तक) पूरा करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।

102 वर्ष पहले बना था यूपी विधान भवन

उत्तर प्रदेश में 102 वर्ष पहले विधान भवन परिसर 21 लाख रुपये की लागत से बना था। यह स्थापत्य कला (Architecture) का एक बेजोड़ नमूना है और इसका गौरवशाली इतिहास है। इस ऐतिहासिक इमारत की आधारशिला 15 दिसंबर 1922 को तत्कालीन संयुक्त प्रांत (United Provinces) के गवर्नर सर स्पेंसर हरकोर्ट बटलर ने रखी थी। भवन लगभग छह वर्षों में बनकर तैयार हुआ और इसका उद्घाटन 21 फरवरी 1928 को तत्कालीन गवर्नर सर विलियम मैरिस ने किया था। अंग्रेजों के जमाने में इसे 'काउंसिल हाउस' कहा जाता था। उस जमाने (1922-1928) में इस शानदार बहुमंजिला इमारत को बनाने में कुल 21 लाख की लागत आई थी। आलीशान भवन का नक्शा (डिजाइन) प्रसिद्ध आर्किटेक्ट सर स्विंटन जैकब और हीरा सिंह ने तैयार किया था।

भवन की वास्तुकला और इतिहास

विधान भवन मिर्जापुर से मंगाए गए हल्के भूरे रंग के बलुआ पत्थरों (Chunar Sandstone) से तराशकर बनाया गया था। इस भवन का मुख्य आकर्षण इसका अष्टकोणीय (Octagonal) विशाल गुंबद है। गोलाकार छतों पर बेहद खूबसूरत रोमन और भारतीय शैली की नक्काशी है, जिसमें नाचते हुए मोर की आकृतियां उकेरी गई हैं। भवन के भीतर और बाहर बारीक और खूबसूरत जालियां और पच्चीकारी का काम वाराणसी के विशेष कारीगरों ने किया था।